कभी भिखारी तो कभी पगड़ीधारी बने मनोज बाजपेयी, वीडियो ने इंटरनेट पर मचाया तहलका

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नई दिल्लीः बॉलीवुड के मंझे हुए कलाकार मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपनी अपकमिंग फिल्म ‘सूरज पे मंगल भारी’ (Suraj Pe Mangal Bhari) का ट्रेलर रिलीज किया है जिस पर फैंस की जबरदस्त प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. वीडियो में मनोज एक साथ कई किरदारों में दिख रहे हैं जिसे उनके फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. 1 मिनट 1 सेकंड के इस वीडियो में मनोज कई दफा अपना गेटअप चेंज करने के लिए बार-बार मेकअप करते दिख रहे हैं.  

मनोज बाजपेयी को कैसे लगे 4 घंटे
दरअसल, पर्दे के पीछे (Behind-the-Scenes) के इस वीडियो क्लिप के जरिए फिल्म मेकर्स ने यह दिखाने की कोशिश की है कि मनोज को कहानी में अलग-अलग किरदारों के लिए तैयार होने में 4 घंटे का समय कैसे लगा और किस तरह से उनका मेकओवर किया गया. ट्रेलर में कभी वह एक भिखारी की भूमिका में तो कभी एक डब्बावाला के रूप में, कभी महाराष्ट्रीयन महिला के रूप में तो कभी एक पगड़ीधारी सरदार के किरदार में दिखते हैं.

इनके अलावा भी तमाम तरह के किरदार हैं. शूटिंग के दौरान एक वीडियो में मनोज का एक खास लुक देखने को मिला जिसमें अभिनेता मोटे आदमी के किरदार में हैं और उन्होंने प्रोस्थेटिक मेकअप किया हुआ है. मनोज को ये लुक देने के लिए मेकअप टीम को तकरीबन 4 घंटे का वक्त लगा था. उन्होंने इस फिल्म में 10 किरदार अदा किए हैं जैसा कि आप फिल्म के पोस्टर में भी देख सकते हैं.

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सस्पेंस के साथ होगा कॉमेडी का तड़का
इस फिल्म में मनोज बाजपेयी के अलावा पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) और दंगल एक्ट्रेस फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh) भी अहम किरदार में हैं. सूरज पे मंगल भारी के ट्रेलर को देखकर लगता है कि फिल्म में सस्पेंस के साथ कॉमेडी का तड़का भी लगाया गया है, जो दर्शकों हंसने के लिए मजबूर कर देती है. फिल्म की कहानी एक शादी की जासूसी एजेंसी (Wedding Detective Agency) पर आधारित है, जो दूल्हे के बैकग्राउंड की जांच करती है. 

फिल्म में सूरज की भूमिका दिलजीत दोसांझ ने निभाई है जबकि मंगल के किरदार में मनोज बाजपेयी नजर आते हैं.  सूरज पे मंगल भारी को अभिषेक शर्मा ने डायरेक्ट किया है और Zee Studios ने इस फिल्म का प्रस्तुतिकरण किया है. फिल्म के निर्देशक अभिषेक शर्मा का कहना है कि, “फिल्म में बीते दिनों की सरलता को ध्यान में रखा गया है. इसकी कहानी में एक सादगी है, जो पहले के जमाने के फिल्मों में देखने को मिलती थी. यह सादगी हमें ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी के फिल्मों की याद दिलाएगी. यह एक साफ-सुथरी पारिवारिक कॉमेडी फिल्म है.”

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