‘मिर्जापुर 2’ के ‘भौकाल’ का मजा लेना चाह रहे हैं, तो इसे जरूर पढ़ें

मनोरंजन

नई दिल्लीः पहले ऐसा लग रहा था कि ‘मिर्जापुर’ सीरीज नेटफ्लिक्स के ‘सेकरेड गेम’ का जवाब है. दोनों ही सीरीज में मारधाड़, खून-खराबा है.  लेकिन ‘मिर्जापुर’ में कहानी इतने विस्तार से बयां हुई है कि दर्शक इससे जुड़ते चले गए हैं. ‘मिर्जापुर’ की कहानी मिर्जापुर और जौनपुर तक सीमित थी, पर इस बार इसका विस्तार लखनऊ और बिहार के सिवान तक है. 

‘मिर्जापुर 2’ (Mirzapur 2) की कहानी में राजनीति भी खूब नजर आई है, जो आपको हकीकत के काफी करीब नजर आ सकती है. 

अपने पहले सीजन की तरह इसमें भी ढेरों किरदार है. हालांकि, कहीं-कहीं खासकर पहले दो एपिसोड में कहानी थोड़ी धीरे लग सकती है, पर ओवरऑल पहले सीजन के मुकाबले कहानी ज्यादा इंटेंस है. पहले सीजन के अंतिम एपिसोड में रक्तपात के बाद जब मुन्ना स्वीटी और बबलू को मार देता है, वहीं से दूसरी सीरीज की कहानी आगे बढ़ती है. 

नरसंहार से बचने के बाद गोलू, गुड्डू और डिम्पी बच कर भाग रहे हैं. वे सभी थके हुए हैं, पर अपने करीबियों की मौत का बदला लेना चाहते हैं. हर किसी के मन में बदले की भावना है. मकसद और दुश्मन अलग हो सकते हैं. सभी अपने किसी करीबी की मौत का बदला लेना चाहते हैं, पर उन सभी की निगाहें मिर्जापुर की गद्दी पर भी है.

महिलाओं के किरदार हैं मजबूत
इस पार्ट में महिलाओं के किरदार को काफी मजबूत बनाया गया है. कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी ने एक बार फिर अपने किरदार में कमाल किया है. इस सीरीज में भी ज्यादातर किरदार वहीं हैं, जो पहली सीरीज में नजर आए थे. पंकज त्रिपाठी कलीन भैया के किरदार में काफी शांत और खतरनाक हैं. 

त्रिपाठी अपने चरित्र में सही तरह का संयम दिखाते हैं. इसमें अभिनेता दिव्येंदु उनके निर्दयी और बुरे बेटे मुन्ना की भूमिका में नजर आए हैं. गुड्डू और गोलू के रोल में अली फजल और श्वेता त्रिपाठी ने भी अपने अभिनय का दम दिखाया है. त्रिपाठी और फजल के पात्रों में एक तरह का संयम नजर आता है. वह भावुक दृश्यों में अपने अभिनय से चकित करते हैं. 

बदले की कहानी है मिर्जापुर
लगभग सभी किरदार बंदूक चलाते हैं और बीच-बीच में नाटकीय डॉयलाग बोल रहे हैं. ‘मिर्जापुर 2’ की कहानी बदला और दबदबे के इर्द-गिर्द घूमती है. गुड्डू पंडित और गोलू अपने कनेक्शन से बिहार के सिवान के दद्दा त्यागी के बेटे भरत त्यागी से अफीम के बिजनेस के लिए बात करते हैं और उसे मना लेते हैं. 

दूसरी तरफ, रतिशंकर शुक्ला का बेटा शरद शुक्ला अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए कालीन भैया और मुन्ना त्रिपाठी के साथ जा मिलता है. शरद को गुड्डू से अपनी पिता की मौत का बदला तो लेना ही है, लेकिन त्रिपाठियों से मिर्जापुर भी छीनना है. 

कालीन भैया व्यापारी और बाहुबली से आगे बढ़ते हुए राजनेता बनने की चाह में अपने बेटे मुन्ना त्रिपाठी की शादी मुख्यमंत्री की विधवा बेटी माधुरी से करवा देते हैं. कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी एक लड़के को जन्म देती है. उस बच्चे का पिता कौन है, यह सस्पेंस है. अंत में मिर्जापुर की गद्दी की लड़ाई कालीन भैया और गुड्डू पंडित के बीच सिमट जाती है.

इस सीरीज का हर एपिसोड एक घंटा लंबा है, जो उचित भी लगता है.

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