सुशांत सिंह राजपूत के परिवार का 9 पेज का खत- बेटे की हत्या, डेड बॅाडी की प्रदर्शनी, धमकी मिल रही है

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कुछ साल पहले की बात है..

ना कोई सुशांत को जानता था, ना उसके परिवार को। आज सुशांत की हत्या को लेकर करोड़ों लोग व्यथित हैं। सुशांत के परिवार पर चौतरफा हमला हो रहा है।

कई फर्जी मामा-दोस्त-भाई

कई फर्जी मामा-दोस्त-भाई

टीवी-अखबार पर अपना नाम चमकाने की गरज से कई फर्जी दोस्त-भाई-मामा-बन अपनी अपनी हांक रहे हैं। ऐसे में बताना जरूरी हो गया है कि आखिर सुशांत का परिवार होने का मतलब क्या है? सुशांत के माता-पिता कमाकर खाने वाले लोग थे। हंसते-खेलते पांच बच्चे थे। बच्चों को किसी बात की कमी नहीं होने दी।

सुशांत ऐसा था जिसके लिए माएं मन्नत मांगती हैं

सुशांत ऐसा था जिसके लिए माएं मन्नत मांगती हैं

उनके सपनों पर पहरा नहीं लगाया। पहली बेटी में जादू था। कोई आया और चुपके से परियों के देश ले गया। दूसरी राष्ट्रीय टीम के लिए क्रिकेट खेली। तीसरे ने कानून की पढ़ाई की तो चौथे ने फैशन डिजाइन में डिप्लोमा किया। पांचवा सुशांत था। ऐसा जिसके लिए सारी माएं मन्नत मांगती हैं। पूरी उम्र सुशांत के परिवार ने किसी से कुछ लिया और ना ही किसी का कोई अहित किया।

सुशांत की मां का जाना पहला झटका

सुशांत की मां का जाना पहला झटका

सुशांत के परिवार को पहला झटका तब लगा जब मां असमय चली गई। फैमिली मीटिंग में फैसला हुआ कि कोई ये ना कहे कि मां चली गई। सो कुछ बड़ा किया जाए। सुशांत के सिनेमा में हीरो बनने की बात उसी दिन चली। अगले आठ-दस साल में वो हुआ जो लोग सपनों में देखते हैं। लेकिन अब जो हुआ वो दुश्मन के साथ ना हो। एक नामी आदमी को बदमाशों लालचियों का झुंड घेर लेता है।

सुरक्षा के नाम पर बेशर्मी

सुरक्षा के नाम पर बेशर्मी

सुरक्षा के नाम पर तनख्वाह लेने वाले खुले आम बेशर्मी से उनके साथ लग लेते हैं। चार महीने बाद सुशांत के परिवार का भय सही साबित होता है। पीड़ित से कुछ मिलना नहीं तो मुलजिम की तरफ हो लेते हैं।

मृत शरीर की फोटो प्रदर्शनी

मृत शरीर की फोटो प्रदर्शनी

सुशांत के परिवार को शोक मनाने का भी वक्त नहीं मिलता। हत्यारों को खोजने की बजाए उसके मृत शरीर की फोटो प्रदर्शनी लगाने लगते हैं। उनकी लापरवाही से सुशांत मरा। इतने से मन नहीं भरा तो मानसिक बीमारी की कहानी चला दी। उसके चरित्र को मारने में जुटे जाते हैं। अंग्रेंजों के वारिश कुछ भी कर सकते हैं तो फैशन परेड में जुट गए है।

सुशांत को लूटने -मारने से तसल्ली नहीं हुई

सुशांत को लूटने -मारने से तसल्ली नहीं हुई

सुशांत के परिवार के सब्र का बांध तब टूटा जब महीना बीतते ना बीतते महंगे वकील और नामी पीआर एजेंसी से लैश हनी ट्रैप गैंग डंके की चोट पर वापस लौटता है। सुशांत को लूटने -मारने से तसल्ली नहीं हुई सो उसकी स्मृति को भी अपमानित करने लगता है। उनकी बारात में रखवाले भी साफा बांध के शरीक होते हैं।

परिवार को धमकी दी जा रही है

परिवार को धमकी दी जा रही है

सवाल सुशांत की निर्मम हत्या का भी है। सवाल ये भी है कि क्या महंगे वकील कानूनी पेचीदगियों के साथ न्याय की भी हत्या कर देंगे? क्या नकली रखवालों पर भरोसा करेंगे? सुशांत का परिवार जिसनें चार बहनें और एक बूढ़ा बाप है, जिसे सबक सिखाने के लिए धमकी दी जा रही है। सब पर कीचड़ उछाला जा रहा है। सुशांत के साथ उनके संबंधों पर सवाल उठाया जा रहा है।

मेहनतकशों को मरवा देते हैं

मेहनतकशों को मरवा देते हैं

तमाशा करने वाले और तमाशा देखने वाले ये ना भूलें कि वे भी यहीं हैं। अगर यही आलम रहा तो क्या गारंटी है कि कल उनके साथ ऐसा नहीं होगा? देश को उधर ले जा रहे हैं जहां मेहनतकशों को मरवा देते हैं, सुरक्षा के नाम पर तनख्वाह लेने वाले बेशर्मी के साथ उनके साथ लग लेते हैं?

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